शिक्षा – देश के विकास की सबसे मजबूत नींव

(Education is the Key to Social Equality & National Progress)

देश के विकास की सबसे बड़ी बाधा शिक्षा का अभाव है। यदि हमारे देश के बच्चों की शिक्षा का उचित प्रबंध किया जाए, तो निश्चित रूप से देश के विकास की गति को एक नई दिशा और रफ्तार मिल सकती है।

इसके लिए हमें सभी जाति, धर्म, वर्ग और पुरानी सामाजिक व्यवस्थाओं को तोड़ना होगा। समाज में फैली कुरीतियों का विरोध करना होगा, लेकिन अहिंसात्मक और समझदारीपूर्ण तरीके से।

समाज की वर्तमान सच्चाई

आज भी समाज में बेटियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता है, और नीची जाति के लोगों के साथ भेदभाव किया जाता है, जो कि पूरी तरह गलत है।

यह सब अज्ञानता के कारण होता है। यदि शिक्षा सही तरीके से सभी तक पहुँची होती, तो ये सामाजिक भेदभाव और कुप्रथाएँ कब की समाप्त हो चुकी होतीं।

आज के दौर में शिक्षा का महत्व

शिक्षा के बिना समाज में लोग भेदभाव, कुरीतियों और कुप्रथाओं का शिकार होते जाते हैं। अतः समाज के सभी लोगों और उनके बच्चों को शिक्षित होने का समान अधिकार है।

जब हमारे देश का कानून यह अधिकार देता है, तो हमें भी इस कानून का पालन करना चाहिए और अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए जागरूक करना चाहिए।

गरीबी और शिक्षा

आज भी बहुत से लोग अपनी गरीबी के कारण अपने बच्चों को शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे परिवारों को इस संस्था के माध्यम से जोड़कर उनकी सहायता की जा सकती है।

शिक्षा पद्धति में आवश्यक सुधार

  • सरकारी विद्यालयों के बच्चों पर विशेष ध्यान देना
  • आपसी प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देना
  • उच्च विद्यालयों के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति परीक्षाएँ
  • खेल-कूद एवं शोधपूर्ण प्रतियोगिताओं का आयोजन
  • प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाना

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में शिक्षा

आधुनिक भारत को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों को स्वरोजगार से जुड़े कौशल और मानवीय संस्कार भी प्रदान करने होंगे।

स्वरोजगार आधारित कोर्स पढ़ाने से छात्र-छात्राएँ पढ़ाई के दौरान ही आत्मनिर्भर बन सकते हैं, अपना रोजगार शुरू कर सकते हैं, और दूसरों को भी रोजगार देने में सक्षम बन सकते हैं।

इससे युवा सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा में अपना समय बर्बाद करने के बजाय कम उम्र में ही देश के विकास में योगदान देना शुरू कर देंगे। इससे हमारे देश को एक नई पहचान मिलेगी।

समान शिक्षा – समान अधिकार

इसके लिए हमें उन सभी जातिगत भेदभावों और पुरानी रीतियों का खंडन करना होगा, जिनमें बेटियों या नीची जाति के लोगों को शिक्षा से वंचित रखा जाता है।

मेरा मानना है कि आज के दौर में शिक्षा की आवश्यकता उतनी ही है जितनी भोजन और जल की।

हमें सभी समुदायों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए हर राज्य, हर गाँव और हर गली तक पहुँचना होगा, जहाँ बच्चों से पढ़ाई के बजाय काम कराया जा रहा है।

हमारी संस्था के माध्यम से ऐसे गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का प्रयास किया जाएगा।

आपसी प्रतियोगिताओं को बड़े स्तर पर आयोजित कर उन्हें पूरे राज्यों तक ले जाना होगा, ताकि बच्चों में पढ़ाई के प्रति नई रुचि और आत्मविश्वास विकसित हो सके।